पार्षद के लिए भाजपा, पर महापौर के लिए कहीं और लगा मोहर-कहां गए 8 हजार वोट नगर पालिक निगम, दुर्ग के चुनाव में भाजपा की टिकट पर वार्ड पार्षद के लिए निर्वाचित 28 पार्षदों के वार्ड में
महापौर प्रत्याशी डा शिवकुमार तमेर को बढ़त नहीं मिल सकी। डा तमेर ने शहर के महज 12 वार्डों में बढ़त ली। शेष 16 वार्डों के मतदाताओं ने पार्षद के लिए तो बीजेपी प्रत्याशी को वोट दिया, मगर महापौर के लिए किसी दूसरे को अपना मत दिया। बात सीधी है, भाजपा में भीतरघात व बाहरघात का खेल जमकर चला है। अलबत्ता, यह दीगर मसला है कि चुनावी जीत ने भाजपा के आंतरिक कलह को सड़क पर आने से रोक लिया। इन सभी 28 वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के खाते में कुल 28,186 मत पड़े, मगर महापौर प्रत्याशी को साढ़े 20 हजार। भाजपाई खेमे में दूर तक यह सवाल उठने लगा है कि शेष आठ हजार वोट कहां गए? डा तमेर को दुर्ग नगर निगम के सभी 58 वार्डों में से आधे से भी कम महज 27 में बढ़त मिली। शेष वार्ड मंच प्रत्याशी राजेंद्र साहू व कांग्रेस प्रत्याशी शंकरलाल ताम्रकार के बीच बंट गए। चुनाव के पूर्व भाजपा में आंतरिक घात-प्रतिघात के कयास लगाए जा रहे थे। चुनाव परिणाम ने इसे पुख्ता कर दिया। शहर के जिन 28 वार्डों में भाजपा प्रत्याशी पार्षद निर्वाचित हुए हैँ, यदि उन वार्डों से डा तमेर को भी वोट मिलते तो उनकी जीत की राह इतनी कठिन नहीं होती। इन वार्डों के आठ हजार वोट भाजपा की जीत का आधार बनते। हालांकि महापौर का ताज भाजपा को किसी तरह जरूर मिल गया, मगर 436 करीबी मुकाबले में हार का खतरा भी था। सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा के महापौर प्रत्याशी डा शिवतमेर को विजयश्री दिलाने में जमीनी भाजपाइयों का कितना हाथ है?