------ पोल-खोल खबर------
लेखक - मोहन लाल सोनी
(कही अनकही दैनिक, विशेष संवाददाता - श्री राकेश तम्बोली के माध्यम से )
लोक निर्माण विभाग दुर्ग के द्वारा चिखली, बेलौदी, नगपुरा मार्ग में 569.36 लाख रुपय की लागत से बनने वाले रोड, पुल, पुलिया सहित कुल 9.20 किमी. पर सडक़ निर्माता ठेकेदार बाफना अर्थमूवर्स को लाखो रुपय का फायदा पहुंचाया है। तकनीकी स्वीकृति की विभाग द्वारा खुली धज्जियां उड़ाई गई है।सडक़ का निर्माण कार्य समाप्त हुए लगभग एक वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन देखने पर यह बरसों पुरान लगता है।
अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों को लाखो का फायदा
लोक निर्माण विभाग दुर्ग के अधिकारियों द्वारा खुले रुप में ठेेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है। श्री तम्बोली के अनुसार इसके कर्णधार उपअभियंता उबैद अहमद फारुकी है, जिनके द्वारा सीधे-सीधे बाफना अर्थमूवर्स को लाभ पहुचाया गया। चिखला बेलौदी नगपुरा रोड की वर्तमान स्थिति देखकर ही उसकी गुणवत्ता का पता चलता है। जगह-जगह सडक़ के डामर उखड़ चुके हैं। सडक़ के किनारे की मिट्टी बह गई है, गांव वालों का कहना है, कि इसकी मरम्मत एक बार भी नहीं हुई है, सडक़ में जो डामर उखड़े हुए हैं, देखने पर पता चलता है, कि कही डामर एक इंच तो कहीं दो इंच डाला गया है, जबकि इसमें 70 एम एम का बिल बनाया गया है।
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शासन को लाखो का चुना , तीन गुना बढ़ाकर बनाया गया बिल
इन कार्यो के लिए बिल प्राकलन-तकनीकी स्वीकृति की जांच करने पर स्पस्ट होता है, कि कार्य की लागत भी लगभग तीन गुना ज्यादा बनाकर ठेकेदार को लाद दिया गया है। बिल वाउचर में विभाग के अनुविभागीय अधिकारी, कार्यपालन अभियंता का हस्ताक्षर होता है, परंतु उनके द्वारा भी इस कार्य को नजरअंदाज कर शासन को लाखों का चुना लगाया गया है। विभाग के द्वारा पुलिया के किनारे एप्रोच बनाना बताया गया है, जबकि गांव वालों को कहना है,कि उबड़-खाबड़ जमीन को मात्र लेबल कर दिया गया है, जो कि प्रत्यक्ष दिखाई पड़ता है।
पानी के रेले बहा कर ले गए, लोक निर्माण विभाग की मेहनत
बने सुरंगों ने फोड़ा भांडा
ड्राइंगडिजाइन से हटकर कार्य
चिखली बेलौदी नगपुरा मार्ग के 2 बाई 2 किमी. पर स्थित चिखली नाला पर मध्यम पुल का निर्माण किया गया है, वह अधीक्षण अभियंता लोकनिर्माण विभाग के आदेश दिनांक 29 अगस्त 2008 से भिन्न है। इसके अर्तगत पुल में मात्र दो पाए होने चाहिये थे, लेकिन वर्तमान में वहां इससे ज्यादा पाए मैाजूद हैं। सांथ ही पुलिया के लंबाई व चौड़ाई में भी हेरफेर पता लगा है। डिजाइन में जो स्वीकृत है, वह वर्तमान स्थिति में अनुपस्थित है। पुल के डाउन में बोल्डर डालना बताया गया है, जबकि बोल्डर डाला ही नहीं गया है, पुल में उपयोग में लाया गया कांक्रिट घटिया स्तर के मसाले से निर्मित किया गया था, जिसका पता बाहर से ही देखने पर चलता है। जिस पर छिपाने के लिए इस पर प्लाटर चढ़ा दिया गया है। सांथ ही पुल के उपर का स्लैब जो कि पिल्हरों में डाली जाती हैं, आड़-तिरछी थी, जिसे प्लास्टर से दबाया गया है।
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तकनीकी स्वीकृति के अनुरुप निर्माण करने का आदेश
अधीक्षण अभियंता ने 29 अगस्त 2008 में कार्यपालन अभियंता रणवीर ंिसंह को स्पष्ट आदेश दिया की तकनीकी स्वीकृति के अनुरुप ही निर्माण कार्य कराएंगे। लेकिन उनके आदेश की अनदेखी की गई। ग्रांम चिखली बेलौदी नगपुरा रोड के 2 बाई 2 किमी पर निर्मित पुल के चारो किनारो में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं जिसमें आए दिन राहगीर गिरते रहते हैं, जबकि पिछली बारिश को गुजरे साल भर बीत गए हैं, लेकिन आज तक इन गड्ढों के नही भरा जा सका। जबकि इन कार्यो को समाप्त हुए लगभग साल भर हुए है। इन गड्ढों को देखने पर ही इनकी कार्य शामिल सामानों की मात्रा स्पष्ट दिखाई देती है।
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कुंद पड़े मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता )
लोकनिर्माण विभाग के मुख्य तकनीकी परीक्षण (सतर्कता) के निरीक्षण अघिकारी वीके शुक्ला कार्यपालन अभियंता अपने सहायक एस मांडलिक के सांथ दुर्ग लोक निर्माण विभाग अनुक्रमांक -2 के अनुविभागीय अघिकारी एम ए रहीम उपअभियंता, यूए फारुकी के समक्ष 16 मई 2008 को इनके द्वारा संपादित कार्यो का निरीक्षण किया, जिसमें कई कमियां पाई गई, जिसे मुख्य तकनीकी परीक्षक के द्वारा 12 बिंदुओं पर नीरीक्षण प्रतिवेदन देते हुए संबंधित अधिकारियों मं प्रमुख अभियंता परिक्षेत्र रायपुर, अधिक्षण अभियंता दुर्ग मंडल व कार्यपालन अभियंता दुर्ग से 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया, किंतु तीन वर्ष बीतने के उपरांत भी संबंधित अधिकारियों के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं करते हुए पत्र को रद्दी में फेक दिया गया, और इस पर कोइ जवाब तलब नही किया गया। इस पर मुख्य तकनीकी परीक्षक द्वारा किसी भी तरह की कार्यवाही न करने पर विभाग के अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट मिल गई, जिसे उन्होंने निर्भिकतापूर्वक बखूबी अंजाम दिया।
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जल्द हो कार्यवाही, कार्यपालन अभियंता द्वारा मामले को दबाया जा रहा
लोकनिर्माण विभाग दुर्ग के कार्यपालन अभियंता श्रीकांत तिवारी द्वारा भ्रष्टाचार के इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा जांच हेतु भेजे जाने वाले पत्र जो राज्यपाल महोदय, मुख्य सचिव एवं महानिरीक्षक एंटीकरप्शन ब्यूरो को भ्रष्टाचार की जांच करने हेतु 31 जनवरी 2011 को प्रेषित किया जाना था, उसे गठरी में बांधकर विभागीय खंडहर में दबा दिया गया। शिकायत की एक प्रति प्रमुख अभियंता लोनिवि रायपुर को दी गई है, जहां से भी आज तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही खबर नही आई। बदले में दोषी उपअभियंता यूए फरुकी को पदोन्नत कर अनुविभाग क्रमांक-2 में अनुविभागीय अधिकारी के पद पर आसीन कर दिया गया है। यह भी विचारणीय बिन्दु है, कि जिस अधिकारी से मुख्य तकनीकी परीक्षक के नीरीक्षण प्रतिवेदन के जवाब चाहे गए हैं, जिसका प्रभाव सीधे-सीधे उपअभियंता पर ही पड़ता है, जो स्वयं यूए फारुकी ही हैं, क्या ये अपने द्वारा किये गए तमाम कार्यो की निश्पक्षता से जांच करेंगे?, चूंकि वर्तमान में लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों के द्वारा किये जाने वाले अनुचित कार्यो के जांचकर्ता वह स्वयं हैं।
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मामले की जांच में खुल सकते हैं ऐसे और भी पोल
यह मामला एक ही नहीं हैं, जो लोकनिर्माण विभाग के उच्चाधिकारियों की गले की छुरी बन सकती है, ऐसे और भी कई मामले है, जो इन्हे, इनके द्वारा खेले जा रहे भ्रष्टाचार के खुले खेल का खात्मा कर सकता है, बशर्ते इसकी जांच सत्यपरकता से होनी चाहिये, नहीं तो हमारी इस खबर का भी कोई असर पता नहीं चल पाएगा। तो इन्हीं शब्दों के सांथ हम शासन से आशा करते हैं, कि लोकनिर्माण विभाग में रफ्तार पकड़े भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए।
टिप - इस खबर से सम्बंधित सारे साबुत जो सूचना के अधिकार के माध्यम से एकत्र किये गए है, वह कही अनकही के विशेष संवाददाता - श्री राकेश तम्बोली के अनुसार उनके पास सुरक्षित रखे हुए है,

